ऑस्टियोपैथी – समस्या जड़ से खत्म

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कॉम्प्लिमंट्री मेडिसिन सिस्टम में ऑस्टियोपैथी एक नया नाम जुड़ रहा है। हालांकि दुनिया के लिए यह पैथी नई नहीं है। अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में यह काफी लोकप्रिय हो रही है। हालांकि भारत के लिए यह नई है। ऐसे में एक्सपर्ट्स यहां भी इसका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। श्रीश्री रविशंकर उड़ीसा में देश की पहली ऑस्टियोपैथी यूनिवर्सिटी भी बनवा रहे हैं। इंग्लैंड से आए ऑस्टियोपैथ डॉ. कीर्ति माथुर ने बताया कि इस पैथी में शरीर की क्रियाशीलता बढ़ाने और दर्द से राहत दिलाने के लिए मैनुअल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके एक्सपर्ट मुख्य रूप से बीमारियों से बचाव का काम करते हैं और इलाज में मरीज के बेहतर इलाज के निए एलोपैथी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर काम करते हैं। इसमें लैबोरेटरी जांच के आधार पर सीधे दवा देने के बजाय मरीज की पूरी हिस्ट्री को जानकर समस्या को जड़ से खत्म करने की कोशिश की जाती है।
क्या है ऑस्टियोपैथी
यह एक मैनुअल तकनीक है, जिससे शरीर का पूरा सिस्टम प्रभावित होता है। इसकी अप्रोच होलिस्टिक होती है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, इमोशनल और आध्यात्मिक हर पहलू को शामिल किया जाता है। ऑस्टियोपैथ मरीज के मसल्स, जोड़ों, कनेक्टिव टिश्यू और लिगामंट्स के जरिए शरीर में एनर्जी के प्रवाह को सामान्य करने की कोशिश की जाती है। इससे शरीर के स्केलेटल, नर्वस रेस्पिरेटरी और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है।
किन समस्याओं में मिल सकता है आराम
आर्थराइटिस के दर्द, डिस्क की समस्याओं, कंधों में जकड़न, सिर दर्द, कूल्हे, गर्दन, और जोड़ों के दर्द, मसल्स में खिंचाव, स्पोर्ट्स इंजरी, साइटिका, टेनिस एल्बो, तनाव, सांस की समस्याओं, प्रेग्नंसी से जुड़ी दिक्कतों, डाइजेस्टिव प्रॉब्लम आदि में ऑस्टियोपैथी फायदेमंद साबित होती है।